रचना की योजना विकासवाद का खंडन करती है
प्रोटीन, कोशिका और डीएनए की जटिलता को यह लेख रचना की योजना का प्रमाण मानता है। संयोग, आनुवंशिक सूचना और जीवन की उत्पत्ति के तर्क पढ़ें।
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कोशिका में अभिकल्प
सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं। एक कोशिका भी अपने आप में सक्षम है: अपना भोजन बना सकती, चल सकती और दूसरी कोशिकाओं से संवाद कर सकती है। अपनी असाधारण तकनीक से वह ठोस प्रमाण है कि जीवन संयोग से नहीं आया।
“इस तरह जटिल जीवन उत्पन्न होने की संभावना उस जैसी है कि कबाड़खाने से गुज़रता बवंडर वहाँ की सामग्री से बोइंग 747 जोड़ दे।”“हॉयल ऐंड इवोल्यूशन”, नेचर, खंड 294, 12 नवंबर 1981, पृ. 105।
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आनुवंशिक सूचना
डीएनए का कूट चार अलग क्षारकों के अनुक्रमों से बनता है। हर क्षारक को अक्षर मानें, तो डीएनए चार अक्षरों की वर्णमाला से बने सूचना-भंडार जैसा है। जीव की सारी जानकारी उसमें संचित है। डीएनए की जानकारी लिखने में लगभग दस लाख पन्ने लगेंगे। यह मानव ज्ञान के सबसे बड़े संग्रहों में एक, एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका से चालीस गुना बड़ा विश्वकोश होगा। इतनी अविश्वसनीय जानकारी कोशिकाओं के छोटे केंद्रक में संचित है, जिसका आकार लगभग एक हज़ार मिलीमीटर है। गणना के अनुसार चाय की चम्मच में समा सकने वाली डीएनए शृंखला अब तक लिखी सभी किताबों की पूरी जानकारी सँभाल सकती है।
ऐसी अद्भुत संरचना निश्चय ही संयोग से नहीं बन सकती। इससे सिद्ध होता है कि अल्लाह ने जीवन बनाया। आश्चर्य नहीं कि विकासवादी डीएनए की उत्पत्ति नहीं समझा पाते! फिर भी सिद्धांत बचाने के लिए “संयोग” अपनाते हैं। प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई आणविक जीवविज्ञानी माइकल डेंटन अपनी किताब इवोल्यूशन: अ थ्योरी इन क्राइसिस अर्थात “विकास: संकट में एक सिद्धांत” में समझाते हैं:
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हीमोग्लोबिन अणु की जटिल संरचना

साइटोक्रोम-सी प्रोटीन
सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं। एक कोशिका भी अपने आप में सक्षम है: अपना भोजन बना सकती, चल सकती और दूसरी कोशिकाओं से संवाद कर सकती है। अपनी असाधारण तकनीक से वह ठोस प्रमाण है कि जीवन संयोग से नहीं आया।
मस्तिष्क की कोशिका की जटिलता
मस्तिष्क में 10,000 से अधिक कोशिकाएँ लगातार एक-दूसरे से संपर्क में रहती हैं। यह संचार नेटवर्क संसार के सभी संचार केंद्रों से अधिक जटिल है।

क्या आप जानते हैं कि मनुष्य की खरबों कोशिकाओं में प्रत्येक के केंद्रक में 900 खंडों का विश्वकोश भरने जितना विशाल सूचना-भंडार है?
फ़्रांसिस क्रिक और जेम्स वॉटसन ने डीएनए की संरचना खोजी। विकासवादी होने के बावजूद क्रिक ने कहा कि डीएनए महज़ संयोग से कभी नहीं बन सकता था।


